कांच तीन प्रकार के होते हैं, जो इस प्रकार हैं:
प्रकारI – बोरोसिलिकेट ग्लास (जिसे पाइरेक्स भी कहा जाता है)
टाइप II – उपचारित सोडा लाइम ग्लास
टाइप III – सोडा लाइम ग्लास या सोडा लाइम सिलिका ग्लास
प्रकारI
बोरोसिलिकेट ग्लास में उत्कृष्ट स्थायित्व होता है और यह ऊष्मीय झटकों के प्रति सर्वोत्तम प्रतिरोध प्रदान करता है, साथ ही इसमें अच्छी रासायनिक प्रतिरोधकता भी होती है। इसका उपयोग प्रयोगशाला में अम्लीय, उदासीन और क्षारीय पदार्थों के लिए कंटेनर और पैकेजिंग के रूप में किया जा सकता है।
प्रकार II
टाइप II ग्लास सोडा लाइम ग्लास होता है, जिसका अर्थ है कि इसकी सतह को सुरक्षा या सजावट के लिए इसकी स्थिरता बढ़ाने हेतु उपचारित किया जा सकता है। सैडाग्लास डिस्प्ले, टच सेंसिटिव स्क्रीन और निर्माण कार्यों के लिए सोडा लाइम ग्लास की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।
प्रकार III
टाइप III ग्लास सोडा लाइम ग्लास होता है जिसमें क्षार धातु ऑक्साइड होते हैं।इसमें स्थिर रासायनिक गुण होते हैं और यह पुनर्चक्रण के लिए आदर्श है क्योंकि कांच को कई बार पिघलाकर फिर से आकार दिया जा सकता है।
इसका उपयोग आमतौर पर पेय पदार्थ, खाद्य पदार्थ और औषधीय तैयारियों जैसे कांच के उत्पादों के लिए किया जाता है।
पोस्ट करने का समय: 31 दिसंबर 2019